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13 Jan-लोहड़ी और गुरू गोबिंद सिंह जयंती के साथ मनाइये ये साल

साल 2019 शुरू हो चुका है जिसके साथ साल का पहला त्योहार भी दस्तक दे चुका है. साल शुरु होने की खुशी अभी कम ही नही हुई थी की इस खुशी में चार-चांद लगाने आ रही है  लोहड़ी और गुरु गोबिंद सिंह जयंती . वैसे तो हर साल लोहड़ी ही साल के पहले त्योहार के रूप में दस्तक देती है लेकिन इस साल लोहड़ी और गुरू गोविंद सिंह जयंती साथ में दस्तक दे रहे हैं और त्योहार की रौनक को डबल कर रहे हैं.

लोहड़ी और गुरू गोविंद सिंह जयंती दोनों ही सिखों के अहम त्योहार हैं जिनका अपना-अपना महत्व है. पंजाबियों के बीच लोहड़ी को नए साल के जश्न के तौर पर मनाया जाता है जिसमें लोग लोहड़ी जलाकर उसके चारों ओर घूमते हुए नाचते गाते है और एक-दूसरे को रबड़ी और मुंगफली देते है. फसलों के कटने और नए फसल के रोपण के इस समय को नये साल के रूप में मनाया जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है की पुरानी फसल के कटने और नए फसल के बोने से नये साल का आगमन होता है जिसके तहत पुरानी चीजों को भुलाकर नयी चीजों के आगमन की शुरूआत की जाती है.

 

गुरू गोबिंद सिंह जयंती को गुरू पर्व भी कहा जाता है और इसे प्रकाशोत्सव की तरह मनाया जाता है. गुरू गोविंद सिंह सिखों के 10वें गुरू थे जिन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी. गुरू गोबिंद सिंह जी ने कहा था कि सिख के लिए संसार से दूर जाना आवश्यक नही है परंतु व्यावहारिक सिद्धांत पर काम करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस पर्व को प्रकाशोत्सव इसलिए कहा जाता है क्योंकि गुरू गोबिंद ने अपने ज्ञान के तहत मनुष्यों को ज्ञान का मार्ग दिखाया था. इन सबके अलावा आपको बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था और वहां उनके नाम का एक गुरुद्वारा भी है.

सिखों के लिए 13 जनवरी का ये दिन बेहद ही खास रहेगा क्योंकि इस दिन वे दिन में प्रकाशोत्सव का जश्न मनाएंगे और रात में लोहड़ी की खुशियां बांटते नजर आएंगें.

Infotainment Desk