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जानें क्या है देवउठनी एकादशी का महत्व..

हिन्दू पंचांग में हर साल 24 एकादशी आती है जिसमें से देवउठनी एकादशी का अपना ही एक महत्व है। देवउठनी एकादशी को देवत्थान एकादशी, देवप्रबोधिनी एकादशी और ग्यारस एकादशी के नाम से भी जाना जाता हैं। कहा जाता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर से चार महीने की निंद्रा लेकर जागते हैं। कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु जागते हैं इनके जागने के बाद से सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं। इस बार देवउठनी एकादशी 19 नवंबर को है।

तुलसी विवाह

देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है। तुलसी विवाह में वे सभी चीजें शामिल करें जो एक विवाह कराने में जरूरी होता है। जिस तरह के विवाह में लाल चुनरी का होना आवश्यक माना जाता है उसी तरह से तुलसी विवाह में लाल चुनरी का प्रयोग होना चाहिए। तुलसी विवाह में सुहाग की सारी सामग्री के साथ लाल चुनरी जरूर चढ़ाएं।

इस दिन बन जाते है बिगड़े काम-

 

  • जिनका दाम्पत्य जीवन बहुत अच्छा नहीं है वह लोग सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए तुलसी विवाह करते हैं।
  • युवा जो प्रेम में हैं लेकिन विवाह नहीं हो पा रहा है उन युवाओं को तुलसी विवाह करवाना चाहिए।
  • तुलसी विवाह करवाने से कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
  • तुलसी पूजा करवाने से घर में संपन्नता आती है तथा संतान योग्य होती है