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ये है रक्षाबंधन का शुभ मूर्त, अगर इसके बाद किया तो होगा ये नुक्सान

  -आचार्य दीपक तेजस्वी

इस वर्ष 7 अगस्त सोमवार को पूर्णिमा के दिन भद्रा प्रातः 11:05 व्याप्त है और इस दिन अपराहन काल लगभग 01:53pmसे 04:34 pm तक रहेगा| अतः इस दिन रक्षाबंधन भद्रा मुक्त अपराहन काल में 01:53 से 04:34pm के मध्य करना चाहिये!

इस दिन भद्रा मकर राशिस्थ होने से पाताल-लोक पर रहेगी

यूं तो भद्रा का शाब्दिक अर्थ है कल्याण करने वाली लेकिन इस अर्थ के विपरीत भद्रा या विष्टी करण में शुभ कार्य निषेध बताए गए हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार अलग-अलग राशियों के अनुसार भद्रा तीनों लोकों में घूमती है। जब यह मृत्युलोक में होती है, तब सभी शुभ कार्यों में बाधक या या उनका नाश करने वाली मानी गई है।

जब चंन्द्रमा, कर्क, सिंह, कुंभ व मीन राशि में विचरण करता है और भद्रा विष्टी करण का योग होता है, तब भद्रा पृथ्वीलोक में रहती है। इस समय सभी कार्य शुभ कार्य वर्जित होते है।

इसी बीच 07:27 से 9:07 Am तक राहुकाल भी है . और इसी बीच रोग की चौघडिया 12 बजे तक चलेगी तथा 12 से 13-30 तक उद्वेग की चौघडिया चलेगी . इन चौघडियाओं में भी प्रथ्वी पर रोग और उद्वेग का प्रभाव रहेगा . जोकि शुभ कार्य में वर्जित है .

*चर की चौघडिया 01:30 pm से 3:00pm तक और 3:00pm से 4-30तक लाभ, और 4-30 से 06:00pm बजे तक अमृत की चौघडिया है . ये मुहूर्त उत्तम हैं।
लेकिन 1-53 से सूतक चालू हो रहे हैं, सुतकों में भी शुभ कार्य वर्जित ओता है
लेकिन कुछ विशेष पर्वों पर धर्मसिन्धु और निर्णयसिंघु के अनुसार सुतकों में भी त्यौहार मनाने की व्यवथा दी गयी है .

धर्मसिन्धु और निर्णयसिन्धु के अनुसार

इदं ग्रहणसंक्रांति दिनेष्पि कर्तव्यं (धर्मसिंधु)

इदं रक्षाबंधनम नियत कालत्वात भद्रावज्यग्रहणदिनेष्पि कार्यं होलिकावत ग्रहण संक्रान्त्यादौ रक्षा निषेधाभावात।
(निर्णयसिन्धु)

अर्थात रक्षाबंधन पर्व को एक सुनिश्चित एवं नियत काल में करने की शास्त्रज्ञा है उस दिन संक्रांति /ग्रहण निषेध का विचार नहीं होगा।

अगर फिर भी कुछ विद्वानों को ऐसा लगता है कि हिन्दू धर्म के श्रेष्ठ ग्रन्थ धर्मसिन्धु और निर्णयसिन्धु सही नहीं हैं
तो वो 1- 30 pm से 13-53 तक 23 मिनट में राखी बाँध सकते है या बंधवा सकते है . बाकी लोग 01-30 pm से लेकर शाम 5 बजे तक बाँध सकते हैं .