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लोकसभा चुनाव 2019 – क्यों कांग्रेस से इतनी नाराज़ है मायावती, यहां जानें पूरी वजह !

कांग्रेस-बसपा के रिश्तों की सियासी इबारत लिखे जानें के अनुमान तब लगाए गए, जब जेडीएस नेता एचडी कुमार स्वामी के शपथग्रहण समारोह में 23 मई 2018 को मायावती और सोनिया गांधी मिल रही थीं. दोनों नेत्रियों के मिलने की तस्वीर ने बीजेपी की बेचैनी बढ़ा दी थी.

लेकिन अब ये रिश्ता कायम नहीं रहा और लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों अपना-अपना दांव चल रही हैं. जिसमें से कुछ दांव सपा-बसपा गठबंधन को परेशान कर रहे हैं. बसपा प्रमुख मायावती कांग्रेस से खासी नाराज भी हैं और यही वजह से उन्होंने किसी भी राज्य में कांग्रेस से गठबंधन न करने का एलान कर दिया.

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लेकिन सपा के साथ गठबंधन के सियासी रिश्ते में फंसी बसपा को कांग्रेस की पारंपरिक अमेठी और रायबरेली सीटों पर अपने प्रत्याशी न उतार कर दरियादिली का प्रदर्शन करना पड़ा. उम्मीद कि गई के अब कांग्रेस भी इसके बदले में बड़ा दिल दिखाएगी और सपा-बसपा में शामिल होकर बीजेपी को आउट करने के लिए गठबंधन की शर्तों पर राजी हो जाएगी.

लेकिन हुआ कुछ विपरीत, कांग्रेस ने 11 प्रत्याशियों के नामों का एलान भी कर दिया और बुधवार को प्रियंका गांधी ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर से हॉस्पिटल में मुलाकात भी की. यह भी आशंका पैदा हो रही है कि गठबंधन अमेठी और रायबरेली में भी अपने प्रत्याशी उतार सकता है. आइए जानते हैं कि आखिर मायावती की कांग्रेस से नाराजगी की क्या वजहें है.

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‘बहनजी: द राइज एंड फॉल ऑफ मायावती’ किताब के लेखक अजय बोस के मुताबिक, ‘कांग्रेस और मायावती का वोट बेस लगभग एक ही है और कांग्रेस अगर अकेले लड़ी तो अब वे उसकी तरफ जा सकते हैं. मायावती को डर है कि कांग्रेस की तरफ दलित वोट खिसक ना जाए.’

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर पश्चिमी यूपी के दलितों में बड़े लीडर बनकर उभर रहे हैं लेकिन मायावती और चंद्रशेखर के मुद्दे बेशक एक हो लेकिन दोनों की राह कभी एक नही हुई. अब कांग्रेस का चंद्रशेखर पर हाथ रखना उन्हें रास नहीं आ रहा है. इसीलिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की चंद्रशेखर से मुलाकात के कुछ ही घंटे बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मायावती से मुलाकात की थी.

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दलितों ही नहीं मुस्लिम वोट भी बीएसपी के वोट बैंक में गिने जाते हैं. यूपी में कांग्रेस के कमजोर होने के बाद मुस्लिमों का एक तबका सपा के साथ जुड़ गया और दूसरा बसपा के साथ. लेकिन अगर बसपा के बजाय ये वोट बैंक कांग्रेस की तरफ खिसक गया, तो कांग्रेस यूपी में मजबूत हो जाएगी.

बहुजन समाज पार्टी की नजरों में मायावती पीएम होनी चाहिए, तो वहीं कांग्रेस की लीडरशिप का एक धड़ा चाहता है कि राहुल गांधी पीएम बनें. जैसे-जैसे कांग्रेस मजबूत होगी, मायावती के पीएम बनने की उम्मीद धूमिल हो जाएगी और प्रियंका गांधी की एंट्री के बाद तो यूपी में कांग्रेस फ्रंटफुट पर खेल रही है.

बसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया ने कहा “मायावती जी ने पहले ही कहा था कि सम्मानजनक सीटें मिलेंगी तो ही समझौता होगा. कांग्रेस ने छत्तीसगढ़,  मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात और हिमाचल कहीं भी हमसे समझौता नहीं किया. लेकिन उसे यूपी में अपनी शर्तों पर लोकसभा सीटें चाहिए, जहां वो सबसे कमजोर है. 49 फीसदी वोट वाली पार्टियों के सामने 6 फीसदी वाली कांग्रेस कैसे अपनी शर्तों पर समझौता कर सकती है. दरअसल, कांग्रेस अभी अपने पुराने अहंकार में जी रही है. जबकि उसे वर्तमान हालात के हिसाब से बात करनी चाहिए.”