Khabron se Hatkar

Ohhh.. तो इसलिए महिलाएं शमशान घाट नहीं जाती !

आपने अपने आस पास कभी ना कभी किसी मृत व्यक्ति को देखा होगा। ये भी देखा ही होगा कि किसी भी मृत की शव यात्रा में केबल पुरुष ही जाते हैं कोई महिला नहीं जाती। आपने ये सोचा भी जरूर होगा कि आख़िर महिलाएं क्यों नहीं जाती तो आइये इस सवाल का जवाब आज हम आपको देते हैं।

इसका पहला कारण ये है कि जब अंतिम संस्कार होता है तो वहाँ महिलाएं इसलिए नहीं जाती कि जब भी किसी की मौत हो जाती है तो शव को घर से निकालते ही पूरे घर के आंगन को साफ़ सुथरा करते हुए धोया जाता है। फिर खाने पीने का सामान तैयार किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि घर में कोई नकारात्मक शक्ति न रह सके। इन्ही सभी कामों को करने के लिए महिलाओं का घर में रहना जरूरी हैं। इसलिए पुरुष अंतिम संस्कार में जाते हैं, महिलाएं नहीं।

इसका दूसरा कारण ये माना जाता है कि श्मशान में आत्माओं का वास होता है और इन आत्माओं और भूत प्रेतों से महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा होता है। दरअसल कहा जाता है कि कोई भी आत्मा पुरुषों की अपेक्षा महिला के शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकती है। आत्माएं जीवित प्राणियों के शरीर पर कब्जा करने का अवसर ढूंढती रहती है। इनके लिए छोटे बच्चे तथा रजस्वला स्त्रियां सहज शिकार होती है। इनसे बचाने के लिए भी महिलाओं तथा छोटे बच्चों को शमशान जाने की मनाही की जाती है। इसलिए शमशान में महिलाएं नहीं जाती हैं।

इसका तीसरा कारण ये है कि हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले परिवार के सद्स्यों को अपने बाल मुंडवाने होते हैं। अगर महिलाएं शमशान घाट जाएंगी तो उनको भी अपने बाल मुड़वाने पड़ेंगे। महिलाओं को इस प्रथा से दूर इसलिए भी रखा जाता है क्योकि पुरुषों का बाल मुंडवाना फिर भी बुरा नहीं लगता लेकिन महिलाओं पर ये सब शोभा नहीं देता। इसलिए भी महिलाएं शमशान नहीं जाती।

महिलाओं का दिल पुरुषों की अपेक्षा कमजोर होता है। महिलाएं अपने किसी प्रिय जन का अंतिम संस्कार होते देख नहीं सकती। उन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही कहा जाता है कि अगर कोई शमशान घाट पर रोता है तो मरने वाले की आत्मा को शांति नही मिलती है। अगर इस काम में महिलाएं शामिल होगी तो वो निश्चित ही रोएंगी इसलिए भी उन्हें शमशान घाट पर आने की मनाही है।