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शाबाना आज़मी की फिल्में करती हैं आज के समय को उजागर

श्याम बेनेगल की फिल्म जुनून, सत्यजीत रे की फिल्म शतरंज के खिलाड़ी, मृणाल सेन की खण्डहर, सईद मिर्जा की अर्ल्बट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है, सँई पराजपेय की स्पर्श, गौतम घोष की पार, अर्पणा सेन की पिकनिक, महेश भट्ट की अर्थ और विनय शुक्ला की गॉड मदर. ये सभी फिल्में अपने समय ही नहीं आज के सच को भी उजागर करती हैं और यही फिल्में पहचान हैं अभिनेत्री शबाना आज़मी की।

अभिनेत्री शबाना आज़मी का जन्म हैदराबाद के एक सैय्यद मुसलिम परिवार में हुआ. उनके पिता कैफी आज़मी और माता शौकत आज़मी हैं. शबाना आज़मी के भाई का नाम बाबा आज़मी है और भाभी का नाम तनवी आज़मी है।

शबाना आज़मी ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत ही एक आर्ट मुवी से की. शबाना आज़मी जैसे कई ऐसे नाम हैं जो कलात्मक शैली से संबन्धित फिल्मों के बाद कर्मशियल फिल्मों में आए।

शबाना की पहली फिल्म 1974 में बनी श्याम बेनेगल की अंकुर थी. दिलचस्प बात ये है कि शबाना इस फिल्म के लिए पहली पसंद नही थी चुंकि कई ख़ास अभिनेत्रियों ने इंकार कर दिया था, इसलिए शबाना आज़मी को फिल्म मिली।

इसी फिल्म से शबाना की किस्मत का सितारा चमका और उन्हें अपने अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरूस्कार मिला. उसके बाद तो शबाना ने अपने काम से अपनी एक अलग पहचान बना ली. शबाना ने 1983 से 1985 तक लगातार तीन साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता।

ये उन्होंने अर्थ, कंधार और पार के लिए जीते. उसके बाद 1999 में शबाना ने फिल्म गॉड मदर  के लिए भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल किया. शबाना ने कड़े परिश्रम और अच्छे अभिनय के कारण न केवल अंतरराष्ट्रीय बल्कि पांच फिल्म फेयर अवार्ड भी जीते. जावेद अखतर की पत्नी शाबना आज़मी को भारत सरकार की और से 2012 में पद्म भूषण अवार्ड दिया गया और वह राज्यसभा के लिए भी नामज़द की गयी।

Bollywood Desk