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SP-BSP alliance: BJP का ये नेता नहीं होता तो सपा समर्थक ले लेते मायावती की जान

SP-BSP alliance

SP-BSP alliance: लगभग 23 साल पुरानी दुश्मनी भुलाकर SP-BSP में एक बार फिर Alliance हो गया। इस बात की घोषणा ख़ुद मायावती और अखिलेश यादव ने एक सांझा प्रैसवार्ता की। इस दौरान मायावती ने उस गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र किया जिसमें BJP की एक नेता ने मायावती की जान बचाई थी।

मायावती ने उस कांड का ज़िक्र करते हुए कहा कि पुराने गिले शिकवे भुलाकर देश हित में ये गठबंधन किया गया है।

अब आपको बताते हैं कि आखिर वो कौनसा बीजेपी नेता है जिसकी बदौलत बसपा सुप्रीमो मायावती ज़िंदा है? और आखिर उसने कैसे और किन परिस्थियों में मायावती को समाजवादी पार्टी के कार्यकताओं से बचाया था।

दरअसल, 1993 की है विधानसभा चुनाव की आग से प्रदेश की सियासत धधक रही थी। बीजेपी को सूबे में सरकार बनाने से रोकने के लिए अकेले किसी एक पार्टी के बस की बात नहीं थीं क्योंकि हाल ही में अयोध्या कांड ने उत्तर प्रदेश में हिन्दू-मुस्लिस की ऐसी बयार चलाई थी। जिसमें बीजेपी का झंड़ा लगातार फहरा रहा था।

बीजेपी और लाल कृष्ण आडवाणी की बढ़ती लोक प्रियता से काशीराम और मुलायम सिंह यादव को डर था कि अगर दोनों क्षेत्रिय दल एक साथ नही आये तो सत्ता भारतीय जनता पार्टी के हाथ में चली जाएगी। लिहाज़ा काशीराम और मुलायम सिंह के बीच गठबंधन हो गया।

विधानसभा चुनाव हुआ गंठबंधन की जीत हुई। मुलायम सिह को सूबे की कमान सौंप दी गई। पर दोनो पार्टियों के बीच समन्वय नहीं बैठा और 2 जून 1995 में बसपा ने सरकार से अलग होने का विचार किया और समर्थन वापसी की घोषणा हो गयी| इसी मुलायम सिंह सरकार अल्पमत में आ गयी|

कहा जाता है कि उस वक्त मायावती ने दिल्ली में बीजेपी के उच्च नेताओं से बात कर समर्थन देने की अपील की और इस बात पर बीजेपी ने मायावती को बाहर से समर्थन देने की हामी भी भर दी।

इस बीच सरकार को बचाने के लिए सपा के लोग चिंतन करने लगे पर जब कुछ ना बन पाया तो वो लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुँच गये जहाँ मायावती कमरा नंबर-1 में ठहरी थीं|

इस दौरान सपा के हथियारबंद लोगों ने गंदी गंदी जाती-सूचक गालियों के साथ बसपा के विधयकों और पार्टी के लोगों पर हमला कर दिया| पर बात यहाँ से शुरू होती है, इस पूरे के पूरे फ़साद में बसपा के लोगों के साथ साथ पोलीस भी असहाय सी हो गयी थी| सपा के लोगों ने मुख्य द्वार तोड़ डाला था और कम से कम 5 बसपा के विधयकों को ज़बरदस्ती घसीटते हुए मुख्यमंत्री के निवास पर ले जाया गया| कुछ को ज़बरदस्ती मुलायम सिंह सरकार के समर्थन में शपथ पत्र पर हस्ताक्षर के लिए बोला गया तो कुछ तो इतने डर गये की उन्होने कोरे काग़ज़ों पर ही हस्ताक्षर कर डाले|

बीजेपी विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने कैसे बचाई मायावती की जान?

उस दौर में फर्रुखाबाद से बीजेपी के नेता स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा नाम हुआ करते थे। कहा जाता है कि अगर आज वो ज़िन्दा होते तो बीजेपी के केन्द्रीय मंत्रिमंडल  में उनकी गिनती होती।

बहरहाल, मायावती ब्रह्मदत्त द्विवेदी को अपना भाई मानती थीं कहा जाता है कि मायवती ब्रह्मदत्त को रखी भी बांधती थीं। मायावती के गेस्ट हाउस में सपा समर्थों के साथ घिरे जाने की सूचना ब्रह्मदत्त द्विवेदी को जैसे ही मिली वो उनकी रक्षा के लिए मात्र एक लाठी लेकर सामने आ गये थे |

ब्रह्मदत्त द्विवेदी भाजपा के विधायक थे और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े थे, तो ज़ाहिर है वो लाठी चलना जानते ही थे| जब गुण्डों ने मायावती के ऊपर जातिसूचक शब्दों के साथ उनकी इज़्ज़त पर हाथ डालने की कोशिश की तो ब्रह्मदत्त द्विवेदी ही अपने गेस्ट हाउस से निकले और अकेले गुंडे से लड़ गये|

ये घटना भारत की राजनीति के माथे का बहुत बड़ा दाग है पर इसके बाद जो मायावती ने अपने भाई के लिए किया वो भी आपको रुला देगा| राजनीति से दूर ये एक ऐसी सच्चाई है जिस पर आज वक़्त की धूल चढ़ गयी है| ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने मायावती को बचाया पर इसकी वजह से उनको मौत की नींद सोना पड़ा, उनकी सरेआम गोली मार कर हत्या कर दी गयी फ़रवरी 11, 1997 में|

मायावती खुद उनके घर पहुँची और ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी के सामने फफक-फफक कर रो पड़ीं| जब ब्रह्मदत्त की पत्नी ने चुनाव लड़ा तो मयवती ने अपील की मेरे लिए अपनी जान देने वाले मेरे भाई की पत्नी को वोट दें| उन्होने उनकी पत्नी के खिलाफ कोई उम्मेदवार खड़ा नहीं किया|

जब 2007 में मायावती चुनाव जीतीं तब समाजवादी पार्टी से विजय सिंह ने बसपा का दामन थामा, पर जैसे ही मायावती को ये बात पता चली तो उन्होने खुद आगे बढ़कर इस बड़े नेता को पार्टी से बाहर फेंक दिया, जानते हैं क्यूँ? क्यूंकी मायावती को ये भनक लग गयी थी की इसी व्यक्ति के कारण उनका राखी भाई जीवित नहीं है