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दिल्ली की इन 14 भुतहा जगहों पर अकेले कभी मत जाना !

दिल्ली देश की राजधानी है। यहाँ घूमने के लिए एक नहीं बल्कि कई जगह हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में ऐसी भी कई जगह हैं जहां कमजोर दिलवालों का जाना मना है। आइए जानते है दिल्ली की उन 10 जगहों के बारे में जिनके बारे में माना जाता है की यहाँ पर आज भी भूतों, आत्माओं या कोई अदृश्य शक्तियो का निवास है। इन जगहों पर रात में जाने की हिम्मत बहुत कम लोग ही जुटा पाते है।

ये हैं दिल्ली की सबसे भुतहा जगह 

दिल्ली कैंट –

दिल्ली कैंट से गुजरने वाले कई लोगों ने एक डरावनी बुजुर्ग महिला को यहां घुमते देखने का दावा किया है।
ये महिला यहां से गुज़रने वाले लोगों को परेशान करती है।

हाउस नम्बर W-3, ग्रेटर कैलाश-1

यहाँ के लोगों का कहना है कि इस घर से रात में अजीब अजीब आवाज़ें आती हैं। किसी के रोने और चीखने-चिल्लाने की। ये घर कई सालों से बंद पड़ा है।

फिरोज़ शाह कोटला, विक्रमनगर –

इस किले का निर्माण सन् 1534 में फिरोज़ शाह तुगलक ने करवाया था। कहा जाता है यहां की हवेलियों और खंडहरों पर जिन्नों का कब्जा है। आज भी यहाँ के लोग हर गुरुवार को आ कर मन्नत मांगते हैं।

द्वारका सेक्टर 9, मेट्रो स्टेशन, द्वारका –

द्वारका सेक्टर 9, मेट्रो स्टेशन के पास कॉल सेंटर में काम करने वाले बताते हैं कि नाईट शिफ्ट में इस इलाके में आने वाले लोगों को थप्पड़ पड़ते हैं। साथ ही वो बताते हैं कि उनके कैब के आगे एक औरत आ जाती है जो तेज रफ्तार से आगे-आगे दौड़ने के बाद गायब हो जाती है ।

ख़ूनी नदी, रोहिणी –

इस नदी के आसपास कोई नहीं जाता है। कारण, नदी के किनारे लाश मिलना। कारण चाहे जो हो, यहां नदी किनारे लाशें मिलना आम बात हो गई है। यही कारण है कि लोग इसे डरावनी जगहों में शुमार करते हैं।

मालचा महल –

ये महल पिछले कई सदियों से वीरान रहने के कारण खंडहर हो चुका है । ये महल जंगल से घिरा है। इस खंडहर हो चुके महल में 1985 में, अवध घराने की बेगम विलायत ने आत्महत्या कर ली थी। कहते है की बेगम की रूह आज भी उसी महल में भटकती है।

म्यूटिनी हाउस, कश्मीरी गेट

ये स्मारक 1857 में मारे गए सिपाहियों की याद में अंग्रेजों ने बनवाया था। कहा जाता है कि उनके साए अभी भी इस इमारत के आसपास रहते हैं। इसलिए इसे डरावना माना जाता है।

भूली भतियारी का महल, झंडेवालान

ये महल किसी ज़माने में तुगलक वंश का शिकारगाह हुआ करता था। इस महल का नाम “भूली भतियारी”, इसकी देखभाल करने वाली महिला के नाम पर पड़ा है। अंधेरा होना के बाद यहां परिंदा भी पर नहीं मारता। अक्सर सुनाई देने वाली अजीबोगरीब आवाजें यहां माहौल को और डरावना बना देते हैं।

संजय वन

ये वन भूतों के लिए कुख्यात है क्योंकि इसके भीतर कई सूफी संतों की दरगाह हैं। यहां कई लोगों का कहना है कि यहां उन्होंने बच्चों के रोने की आवाजें सुनी हैं। अंदर से ये वन घना और डरावना भी है। यहाँ आने की गुस्ताख़ी भी कोई नहीं करता।

जमाली-कमाली का मकबरा और मस्जिद, महरौली,

ये मस्जिद दिल्ली के महरौली में स्थित है। यहां सोलवहीं शताब्दी के सूफी संत जमाली और कमाली की कब्र मौजूद है। इस जगह के बारे में लोगों का विश्वास है कि यहां जिन्न रहते हैं। कई लोगों को इस जगह पर डरावने अनुभव हुए हैं। मकबरे में दो संगमरमर की कब्र हैं, एक जमाली की और दूसरी कमाली की।

करबला कब्रिस्तान

ये कबरिस्तान काफी पुराना है। इस कब्रिस्तान में साये दिखते हैं। आसपास के लोगों ने यहाँ भूत प्रेतों के दिखने के दावे किए हैं।

खूनी दरवाजा

यहीं बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को अंग्रेजों ने मार डाला था। कहते हैं, तभी से तीनों शहज़ादे इसी इलाके में साया बनकर मौजूद रहते हैं।

 

अग्रसेन की बावली, कनॉट प्लेस

आज़ादी से पहले की बनी इस बावली के बारे में कहावत है कि पहले इसमें काला पानी भरा रहता था जिसमें लोग कूद कर आत्महत्या किया करते थे। तब से इस जगह को भुतहा माना जाता है।

निकोल्सन कब्रगाह, सिविल लाइंस

निकोल्सन कब्रगाह दिल्ली की सबसे पुराने कब्रगाहों में से एक है। यहां का सन्नाटा तो बस जानलेवा ही होता है।