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क्या है जर्मन शेफर्ड के नाम का राज़….

नरम और घने बाल, खड़े कान, तीखे दांतों के बीच से बाहर निकली जीभ इनके साथ वफादारी और सौम्य व्यवहार ने जर्मन शेफर्ड को दुनिया भर में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कुत्तों की प्रजाति के रूप में मशहूर किया है, यही कारण है कि आज के समय में जर्मन शेफर्ड कुत्तों को रखने के शौकीन पूरी दुनिया में हैं. इस नस्ल के कुत्तों को Alsatian के नाम से भी जाना जाता है. नाम से ही साफ होता है कि इस नस्ल की खोज और नाम जर्मनी से जुड़े हुए हैं. वैसे देखा जाए तो जर्मन शेफर्ड एक नई नसल है जिसको 1899 में विकसित क्या गया.

 

जर्मन शेफर्ड का जन्म जर्मनी में हुआ था। यह नसल एक कामगारी कुत्तों की नसल है जिसे की भेड़ बकरियों को इकट्टा करने और उनकी रक्षा करने के काम में लिया जाता था और आज भी लिया जाता है. आज उनकी चतुराई, समज, आज्ञाकारीपन और कई अन्य कारणों से उन्हें पूरे विश्व में पुलिस और सेना में सुरक्षा के मद्देनजर काम में लिया जाता है. उनकी आज्ञाकारीपन की वजह से ही यह सबसे ज्यादा पाले जानी वाली कुत्तों की नस्ल बन गयी है.

क्या है जर्मन शेफर्ड के नाम का राज़….

इस नस्ल की खोज़  वों स्टेफनइट्ज़ ने की जिसका नाम  Deutscher Schafferhund  रखा गया। जिसका नाम का मतलब जर्मन शेफर्ड है. इसका नाम यह इसलिए रखा गया क्योंकि इसे असलियत में चरवाहों की मदद करने और भेड़ बकरियों की रक्षा करने के लिए विकसित किया गया था. शेफर्ड कुत्तों को सबसे पहले ब्रिटेन में सन 1908 में लाया गया और यूके केंनल क्लब ने इस नसल को सन 1919 में मान्यता दे दी.

क्यों दी जाती हैं ट्रेनिंग…

कुत्ते केवल देखने में या रंग, आकार और नस्ल में ही अलग नहीं होते बल्कि हर कुत्ते का व्यक्तित्व भी अलग होता है, वैसे ही जैसे हर इंसान दूसरे से किसी न किसी मायने में अलग है. कुत्तों की प्रकृति और उनके स्वभाव को समझाने के लिए उनको ट्रेनिंग दी जाती है.